My Jim Corbett Trip – An Unfinished Journey to Soul


Jim Corbett
Jim Corbett

अभी कुछ दिनों पहले जिम-कॉर्बेट पार्क जाना हुआ था. दोस्तों ने बताया था कि जिमकॉर्बेट पार्क घूमकर आओ, काफी फ्रेश फील करोगे. इससे पहले कई सालों से कहीं गया भी नही था. क्यों‍कि जब से काम करना शुरु किया है तब से कभी इतना टाइम नहीं मिला. हमेशा जॉब चेंज करने से पहले सोचता कि नई जॉब पकड़ने से पहले कहीं लंबी ट्रिप पर जाऊंगा. पर कभी भी दो जॉब्स के बीच में लंबी ट्रिप का टाइम नहीं मिला. कई सालों से एक ही शेड्यूल है. सुब‍ह उठना, तैयार होना और ऑफिस पहुंच जाना फिर शाम को वापस कमरे पर आ जाना. कभी ऑफिस के फ्री आवर्स में राहुल सर (राहुल पंडिता) का लेटेस्ट आर्टिकल ढूंढना, फिर उनके आर्टिकलों में अपने सवालों के जवाब खोजने की कोशि‍श करना. फिर अनचाहे मन से अपने काम पर वापस लौट जाना. इस सबके बीच में जिमकॉर्बेट जाना कुछ ऐसे था कि कैदी को पुलिस वाले एनकांउट करने से पहले भागने की आजादी देते हैं. कैदी को पता होता है कि वह भाग नहीं पाएगा लेकिन फिर भी वह भागता है और गोली लगते ही गिर पड़ता है. कुछ ऐसे ही मैं और मेरे दोस्‍त ने पैसे इकठ्ठे कर लिए थे और छुट्टियों का इंतजाम भी कर लिया था जिसके बूते पर हम ऑफिस के एसी केबिनों से बाहर निकलने के सपने देख रहे थे. अब फ्री ऑवर्स में राहुल सर के आर्टिकल्स की जगह जिमकॉर्बेट के बारे में बात करने ब्लॉग्स ने ले ली थी. हम यूट्यूब से लेकर ब्लॉग्स से अपने ट्रेवल प्लान के लिए जानकारी इकठ्ठा कर रहे थे. अब बस तारीख तय किया जाना था जब हम लोग इस कंक्रटी के जंगल से बाहर निकलेंगे.

इसी बीच एक दिन, एक जानने वाले भइ्या का फोन आया और पता चला कि वे लोग एक शादी में शामिल होने हलद्वानी जा रहे हैं और गाड़ी बुक कर रहे हैं. उन्होंने मुझसे शादी में चलने के बारे में पूछा तो मैने झट से हां कर दिया क्योंकि जिमकॉर्बेट हलद्वानी से ज्यादा दूर नहीं है. मैंने अपने दोस्त को इस बारे में बताया तो वो भी झट से तैयार हो गया क्योंकि गाड़ी किसी भी ट्रिप में ट्रेन से ज्यादा आजादी देती है. आप कहीं भी रोककर चाय पी सकते हैं और कुछ भी कर सकते हैं. इसके बाद भइ्या से पैसे वगैरह की बात हो गई. यह तय हुआ कि हलद्वानी त‍क जाने में जितना भी खर्च होगा उस खर्च को सभी जाने वाले लोगों में बांट लिया जाएगा.

इसके बाद एक रात हम लोग हल्द्वानी के लिए निकल पड़े. जैसे जैसे हमारी गाड़ी शहर की सीमा से बाहर निकल रही थी वैसे वैसे मन में कुछ अजीब से अहसास जन्म ले रहे थे. मैंने इससे पहले कभी पहाड़, जंगल या फिर कहें कि जिंदगी के अधखुले पन्ने नहीं देखे थे. ये पन्ने अधखुले इसलिए थे क्योंकि इससे पहले हमें यह पता था कि हमें पहा़ड़ों के बारे में बहुत कुछ पता है लेकिन कितना पता है यह कहना मुश्किल था. ऑफिस में कोई ट्रेवल कंटेंट का प्रोजेक्ट आए तो जिमकॉर्बेट जाने वाले लोगों के लिए बेस्ट टिप्स टाइप दर्जनों आर्टिकल लिखे जा सकते थे. लेकिन अब जब खुद जा रहा था तो दिल में कुछ अजीब सी अधुरी सी खुशी हो रही थी. खुशी अधुरी इसलिए थी क्योंकि उड़़ान आजाद नहीं थी. भइ्या लोगों को सुबह जल्दी हलद्वानी पहुंचना था, ड्राइवर को तीन दिनों के लिए ही बुक किया गया था. ऐसे में गाड़़ी रोककर हाईवे किनारे बसे किसी गांव में जाना एक बेवकूफी का परिचायक थी. उगते हुए सूरज को देखने के लिए गाड़ी रोकने की मांग करना पागलपन समझा जा सकता था. किसी खाली रोड पर पाल्थी मार के नही बैठ सकते थे क्योंकि गाड़ी में सवार बाकि लोगों को सुबह जल्दी हलद्वानी पहुंचना था. भइ्या को शादी में शामिल होना था, ड्राइवर को नाइट पूरी करनी थी, दोस्त की लॉयन सफारी का टाइम निकला जा रहा था. लेकिन मैं तो इस सफर में कहीं छूट रहा था. घर से निकला था बाघ देखने के लिए लेकिन अब बाघ देखने की इच्छा जैसे खत्म हो रही थी. सभी अपने-अपने क्रेज के मारे भागे जा रहे थे. इसके बाद हम अगली सुबह हलद्वानी पहुंच गए. हलद्वानी से रामनगर की दूरी सिर्फ कुछ किलोमीटर ही है तो हम लोग भइ्या लोगों को हलद्वानी छोड़कर रामनगर के लिए रवाना हो गए. रामनगर पहुंचने पर हमने अपने साथ लाई गाड़ी को वापस भेज दी.

Jim Corbettरामनगर पहुंचकर पता चला कि जिमकॉर्बेट पार्क की सफारी के लिए वहां पहुंचने पर आधि‍कारिक रजिस्ट्रेशन संभव नही था. यह काफी शॉकिंग था क्योंकि हमें इस बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी. इसके बाद हमें एक गाइड मिला जिसने हमसे वादा किया कि वह हमें जिमकॉर्बेट पार्क में एंट्री दिला सकता है. उसने कहा कि वह गाड़ी को किसी अन्य रास्ते से ले जाएगा जिससे रजिस्ट्रेशन के पैसे ना देने पड़ें. अपने मित्र से बात करके हमने उस गाइड को बुक कर लिया. लेकिन जैसे ही हमने उसके हाथ में पैसे थमाए उस गाइड ने अपने एक असिसटेंट ड्राइवर को हमारे सुपुर्द कर दिया जिसका हमने विरोध किया. लेकिन गाइड ने कहा कि यह हमारे उस्ताद हैं और आपको शेर दि‍खाएंगे. ड्राइवर ने भी गाड़ी स्टार्ट करते करते शेर दिखाने का आश्वासन दिया. इसके बाद गाड़ी के कच्चे रास्ते पर पेड़ों के झुरमुटों के बीच उतरते ही मेरे दिमाग से बाघ निकल चुका था. मैं इन पेड़ों को एक टक देखते रहना चाहता था. वो पेड़ उस कच्चे रास्ते के दोनो ओर ऐसे खड़ें थे जैसे किसी सम्राट के दरबार में घुसने पर उसके दरबारी सम्मान में खड़े हो जाते हैं. हालांकि पेड़ों के सर दरबारियों की मानिद झुके हुए नहीं थे. वे तो खुले आसमान में आजाद पंछियों की तरह लहलहा रहे थे. यहां के पेड़ों को शहरी पेड़ों की तरह बिजली के तारों ने घेर के नहीं रखा था.

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My younger brother enjoying smoothness of gravels.

जैसे-जैसे गाड़ी आगे बढ़़ी हम पेड़ों के झुरमुटों से निकलकर नदी के प्रवाह क्षेत्र में आ गए थे. यहां पर छोड़े बड़े गोल चपटे पत्थरों का एक पूरा कुनबा फैला हुआ था. नदी के लगातार बहाव से पत्थर चमकदार और चिकने हो गए थे. लेकिन इनकी पत्थरों की चिकनाहट काई जैसी नहीं थी. आप पानी की एक पतली सी धार में पत्थरों के ऊपर खड़े हो सकते थे. यह देखकर मेरा मन हुआ कि कम से कम इस धार में एक बार खड़े हो लिया जाए तो ड्राइवर ने जीप रोक दी और हम उतरकर इन पत्थरों के बीच कुछ देर बैठ पाए.

DSC_0882तभी ड्राइवर ने कहा, ‘साब, जल्दी चलिए अब बाघ के पानी पीने का टाइम हो रहा है, यहां खतरा हो सकता है.’ यह सुनकर दिल कांप गया और हम अपने दिल को वहीं छोड़कर गाड़ी पर बैठ गए. इसके बाद धीरे-धीरे गाड़ी पहाड़ पर चढ़़ रही थी तो मैंने ड्राइवर से पूछा कि क्या शेर दिखेगा तो ड्राइवर ने जवाब दिया, ‘जी साब’ दिख सकता है, कुछ दिनों पहले यहीं दिखा था.’ इसके बाद कई बार मेरा मन हुआ कि ड्राइवर से कहुं कि मुझे खुद से जंगल में चलने की इजाजत दे दे पर हम भाग रहे थे क्योंकि हमें बाघ देखना था. लेकिन हम भागते-भागते सफारी के अंत पर पहुंच गए पर बाघ नहीं दिखा. बाघ तो बाघ हाथी, हिरन या कुत्ता भी नहीं दिखा. अपने गाइड पर भरोसा करके हम आगे बढ़ रहे थे तभी जंगल से बाहर निकलने का गेट आ गया. इस सफारी पर सबसे ज्यादा गुस्सा मुझे आ रहा था क्योंकि हमनें शेर के चक्कर में डूबता हुआ सूरज मिस किया और ना जानें कई ऐसी जगहों पर ठहर कर खुली हवा में सांस लेने से वंचित रह गए जहां सिर्फ हम थे और हमारी सांसों का शोर. लेकिन हम नहीं रुके क्योंकि शेर आ सकता था. इसके साथ ही दिन खत्म हो गया और हम लोग अपने सामान्य से रिसॉर्ट पहुंच गए. यहां पहुंच कर मैंने अपने गाइड से शेर या कोई भी जानवर ना दिखाने की शिकायत की. इस पर हमारे गाइड ने कहा कि साब शेर सुबह घूमने आता है और सुबह की सफारी लेंगे तो आपको काफी अच्छी चीजें देखने को मिल सकती हैं. अनचाहे मन से हमने सुबह की सफारी भी बुक कर ली. रिसॉर्ट और मॉर्निंग सफारी के पैसे भी दे दिए गए लेकिन सफर के आगे बढ़ने के साथ ही इस सफर से दिमाग सफर कर रहा था. वो आजाद होने की खुशी कहीं गुम थी, ना जानें वो कहां थी. लेकिन वो कहीं गुम थी. फिर सुबह हो गई और हम सब लोग मॉर्निंग सफारी पर निकल पड़े. इस सफारी में हमने गाइड से जिद करके, कच्चे रास्तों पर थोड़ी-बहुत चहल-कदमी की लेकिन सफारी सिर्फ दो घंटे के लिए थी और कच्चे धूलभरे रास्तों पर चलना पूरी तरह से बेवकूफी थी. तो जी हम फिर सवार हो गए अपनी सफारी वाली जीप पर और चलने लगे रिसॉर्ट की ओर. शेर इस बार भी नहीं दिखा और जंगली सुअर भी.

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Our safari reaching to its end while heading towards our resort.

रिसॉर्ट पहुंचकर मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और पूछ बैठा कि क्या जहां हमने दो दिन सफारी की है वही जिम कॉर्बेट पार्क है तो गाइड ने कहा, ‘नहीं, साब वो तो पार्क से जुड़ा हुआ जंगल है.’ यह सुनकर मुझे काफी गुस्सा आया और मैनें कहा, ‘तुमने मुझे बेवकूफ बनाया’. इस पर गाइड ने कहा, ‘साब, आपने पूछा ही नहीं कि यह कौन सी जगह है. आप तो बस शेर के बारे में पूछ रहे थे और शेर कभी कभी इन जंगलों की तरफ भी आ जाता है जिससे हमारे जैसे गाइडों के घर चल जाते हैं. लेकिन आपकों बेवकूफ बनाने की कतई मंशा नही थीं’. यह सुनकर मैं थोड़ा शांत हुआ. मैं सोच रहा था कि शेर देखने के चक्कर में क्या मिस कर दिया. काश: देखने की बजाए थोड़ा महसूस करने की कोशि‍श करता, गाइड से सनसेट देखने की जिद करता. जंगल के हर कोने में शेर खोजने के बजाए तो अलग-अलग तरह के पेड़ थे उनकी पत्तियों को देखने की कोशि‍श करता. बाघ की सुनहरी काया खोजने के चक्कर में वो रंग-बिरंगे जंगली फूल और पेड़ ऐसे लगे जैसे ट्रेफिक भरी रोड पर काला धुआं होता है और आपको धुऐं के उस पार चल रही गाड़ी को देखकर अपनी स्पीड मैंटेन करनी होती है.

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Here…we kept looking for tiger and missed these wonderful trees.

मैं यह सब सोच ही रहा था कि सामने खड़ा गाइड बोला, ‘साब, आप जिसलिए इतने पैसे खर्च करके आए आपको वो नहीं मिल पाया ना? और आप शेर देखने के लिए नहीं आए थे ये आप भी जानते हैं! ’ गाइड के मुंह से यह बात सुनकर दंग रह गया कि इसको कैसे पता चला कि मैं शेर देखने नहीं आया था. हालांकि मैंने अपने आपको यही बताया था कि मैं शेर देखने जा रहा हुं. पर ये सच था कि मुझे शेर में कोई खासा इंटरेस्ट नहीं था. पर ये बात गाइड को कैसे पता चली यह बात शॉकिंग जरूर थी.

मुझे बैचेन देखकर गाइड ने कहा, साब अगर खुल के इस जगह को महसूस करना हो, खुद से आजाद होना हो या खुद से मिलना हो तो आज रात और स्टे करिए. कल सुबह होते ही सामने वाले रस्ते पर पैदल चलना शुरू कर दी‍जिएगा और हां इस रास्ते पर शेर नहीं आते. इसलिए चिंता की कोई बात नहीं हैं. हां बस अपने साथ किसी और को टांग कर मत ले जाना. मसलन अपने कैमरा फोन, आईपॉड और पर्स जैसी चीजों को साथ मत ले जाना. जिस पेड़ पर चढ़ने का दिल करे चढ जाना, जहां बैठने की इच्छा करे वहां बैठ जाना. लेकिन डरि‍एगा नहीं क्योंकि यहां डरने के लिए कुछ भी नहीं है. आप जहां से आ रहे हैं वहां से खतरनाक कोई जगह नहीं है. इसलिए यहां तो बस खुद को खुला छोड़ दीजिए जैसे पंछी और जानवर खुले घूम रहे हैं.’

DSC_0784गाइड से यह सुनकर ऐसा लगा कि जैसे उसने मेरे मन की बात पढ़़ ली हो. उस बात को जिसे मैं स्वयं भी अब तक नहीं पढ़ पाया था. लेकिन जब तक इसका पता चला हमारी ट्रिप का टाइम पूरा हो गया था. हलद्वानी में गाड़ी वेट कर रही थी और अगले दिन सुबह हमें ऑफिस भी पहुंचना था. इसलिए मैंने गाइड की बात को दिमाग के किसी कोने में संजों कर रख लिया. खुद से कहा कि अगली बार के लिए बस खुद को खुला छोड़ने आउंगा. पर अब तक वो अगली बार नहीं आई. एक बार मन है कि मैं जाऊंगा किसी ऐसी जगह जहां मैं कम से कम एक हफ्ते रह सकूं, टूरिस्टों का जमावड़ा ना हो और अंजान जगह पर एक अंजान की जिंदगी बसर कर सकूं, कुछ लिख सकूं, कुछ पढ़़ सकूं और स्वयं को महसूस कर सकूं. मैं जाऊंगा…जल्द ही जाऊंगा.

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