In a Free State by VS Naipaul (Hindi) – A Tasteless Translation


in a free stateकिसी भी अनुवादित किताब की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितने सरल अंदाज और परिचित शब्‍दों के साथ मूल किताब के तत्‍व को अपने रीडर्स तक पहुंचाती है। एक मीनिंगफुल ट्रांसलेशन अपने रीडर्स से एक अदृश्य गाइड की तरह जुड़ता है। यह कुछ ऐसे है कि आपको गांव की संस्कृति में रचे-बसे एक ग्रामीण को गांव से बाहर निकाले बिना फ्रांस की यात्रा करानी हो। लेकिन इस यात्रा की सार्थकता इस बात में है कि ग्रामीण आपकी बात सुनते-सुनते फ्रांस की गलि‍यों में नंगे पैर चलते हुए पत्‍थरों की छुअन को महसूस कर सके। एफिल टावर के गगनचुंबी शि‍खर पर खड़े होकर पेरिस शहर की भव्‍यता को अपनी आंखों से देखने का अनुभव प्राप्‍त कर सके। पेरिस के कॉफी कैफे में बैठे लोगों के बीच फ्रेंच भाषा में जारी बातचीत को सुनकर पैदा होने वाली उत्सुकता महसूस कर सके। और कभी मौका मिलने पर फ्रांस पहुंचे तो ऐसे अनुभव करे जैसे वह उन सभी जगहों को दूसरी बार देख रहा हो। लेकि‍न यह एक कठिन काम है। ऐसा करने के लिए आपको डिक्शनरी को किनारे रखना पड़ता है और जिंदा लोगों के बीच उतरना होता है। उन शब्दों, संज्ञाओं और परिचयों की खोज करनी पड़ती है जिनसे आम जनमानस का रोज साबका पड़ता है। कोल्ड-ड्रिंक के जिक्र के लिए ठंडा पेय की जगह ‘ठंडा’ शब्द ढूढ़ना पड़ता है। कारिंदों की जगह मजदूर या वर्कर्स शब्द की तलाश करनी पड़ती है और पोशाक को ड्रेस या पहनावा कहना पड़ता है।

ऐसा ना करते हुए हम डिक्शनरी की सहायता से ट्रांसलेशन को तो ठीक करते जाते हैं। लेकिन शब्द दर शब्द रीडर्स से दूर होते जाते हैं। वीएस नॉयपॉल की किताब ‘इन ए फ्री स्टेट’ के ट्रांसलेशन को पढ़ते समय मुझे कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ. ऐसे लगा जैसे कोई कोर्स की किताब पढ़ रहा हुं। जैसे सुगर होने पर बिना चीनी की चाय पीनी पड़ रही हो। बिना तेल मसाले वाली लौकी और तौरई की सब्जि‍यां खानी पड़ रही हों। किताब के ट्रांसलेशन के बारे में कोई भी राय बनाने से पहले मैंने ट्रांसलेशन के समय पर नजर डाली तो पता चला कि किताब को साल 2013 में ही ट्रांसलेट किया गया है। ऐसे में ट्रांसलेशन को कालांतर में शब्‍दों के चलन में आने वाले बदलाव का फायदा नहीं मिल सकता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि समय के साथ आम बोलचाल की भाषा के शब्दों उलटफेर होता रहता है। ट्रांसलेशन को इन चुनौतियों से होकर गुजरना होता है। लेकिन कथानक में भाव की प्रमुखता अहम है।

जरा किताब में झाकें –  
“सबसे बुरा होना तो अभी बाकि‍ है। हमें लड़के के मां-बाप के साथ भोजन पाना है। जो कुछ हुआ उससे वे बेखबर हैं। और हम दोनों, मुझे और मेरे भाई को नीचे बैठकर जीमना है। और लाश घर में है,  एक संदूक में। और भोजन उसी घर में। ठीक वेसे ही जैसे कि रोप फ़िल्म में था। ऐसा शुरू-शुरू में है, ऐसा सदा के लिए है, और बाकि हर चीज किसी बिडम्बना की भांति। पर हम खाते हैं। मेरा भाई काँप रहा है; वह एक अच्छा अभिनेता नहीं है। जिन लोगों के साथ हम खाना खा रहे हैं, मैं उनके चेहरे नहीं देख सकता, मुझे नहीं पता कि वे कैसे दिखते हैं।”

50 Words Verdict
अगर आप किताब के दिए अंश को देखकर इस अनुवाद को पढ़ने में सहजता महसूस करते हैं तो आप इस किताब को पढ़ सकते हैं. लेकिन यदि आप नॉयपॉल सर की अंग्रेजी की किताब पढ़ सकते हैं तो जरूर अंग्रेजी की किताब को पढ़ें.

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