आप राजनेता हैं केजरीवाल जी, सेल्समैन न बनिए!


Arvind Kejriwalप्रिय मुख्यमंत्री जी,

आज आपको ये खुला पत्र इस भरोसे के साथ लिख रहा हूं कि आप नहीं तो आपके समर्थक जरूर इस पत्र में जाहिर की गई चिंताओं को समझेंगे. आपके दफ्तर पर कथित सीबीआई रेड के बाद से आप आक्रामक मुद्रा में हैं. आपने पहले प्रधानमंत्री को डरपोक बताया. फिर टीवी पर उन्हें और सीबीआई को उल्टा-सीधा कहा.

किसको कहा डजंट मैटर

खैर, मैं, किसको कहा के मुद्दे से कतई विचलित नहीं हूं. इससे पहले जनता रोबोट से लेकर रबर स्टांप तक न जाने क्या-क्या कह और सुन चुकी है. आपने तो अभी तक सिर्फ डरपोक ही कहा है. और डरपोक होना कोई बुरी बात भी नहीं.

लेकिन, मुद्दे की बात ये है कि आपने ऐसा क्यों कहा. वो भी टीवी पर. कुछेक कार्यकर्ताओं के सामने गुस्सा फूट पड़ना अलग बात है. लेकिन, नेशनल मीडिया के सामने क्यों? ऐसी बयानबाजी चीख-चीखकर कहती है कि आप जानबूझ कर वो भाषा बोल रहे हैं जो आपके वोटबैंक को ये बताए कि आप उनके लिए फैजल खान हुए जा रहे हैं. और, एक-एक करके उनके साथ हुए अन्यायों का बदला लेंगे.

पॉलिटिकल कंज्यूमेरिज्म उर्फ राजनैतिक उपभोक्तावाद

ये राजनैतिक उपभोक्तावाद की अगली कड़ी का विकास है. पहले नेता उत्पादक था और जनता ग्राहक. नेता किसी न किसी विचारधारा में अपने नारे भिगोकर जनता को बेचते थे. और, जनता बाल में लगाने वाले रंगबिरंगे रिबनों जैसे नारों को खरीद लेती थी. लेकिन, अब ऐसा नहीं है. नई कड़ी में नेता उत्पादक न होकर सेल्समैन है. ये नेता विचारधारा की पूंजी में यकीन नहीं रखते. और, रखें भी क्यों? जब हद्द लगे न फिटकरी रंग चोखो आए तो काहे विचार और धारा का सहारा लिया जाए. ऐसे में जनता जैसी भाषा चाहती है नेता वैसी भाषा बोलता है.

तमाम तनावों के तले दबी जनता को बस परफॉर्मर्स चाहिए. न्यूज चैनल पे एंकर जबरदस्त मजा दे, कॉमेडी शो में ‘शर्मा जी’ और पॉलिटिक्स में नेता जी. सो, आप मोदी जी को बादलों का ताऊ बताते रहो. लेकिन, इस नूरा-कुश्ती में आप अपना ही बड़ा नुकसान कर रहे हैं. इट्ज लीडर्स जॉब टू लीड. आपके इस अंदाज से आपकी ही पार्टी के नेताओं में कैसे गुण पैदा होंगे.

किसी भी पेशे में सर्वांगीण उत्कर्ष का रास्ता शिखर की ओर देखने और पूरी श्रद्धा से उसके कदमों का अनुपालन करने से होकर जाता है. ऐसे में आपके पास तो जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और अटल बिहारी वाजपेयी की थाती है.

इन नेताओं ने घोर मतभेद होने के बाद भी कभी अपने विरोधियों के प्रति ऐसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग नहीं किया. मैं यहां अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी की उनकी सरकार के प्रति टीका-टिप्पणी पर दिए गए भाषण को कोट कर रहा हूं. पढ़िए, अगर पढ़ सकें तो.

अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं –

अभी जब मैंने श्रीमति सोनिया गांधी का भाषण पढ़ा तो मैं दंग रह गया, उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार अक्षम, संवेदनहीन, गैर-जिम्मेदार और भ्रष्ट कहा है. राजनीतिक क्षेत्र में आपके साथ जो कंधे से कंधा लगाकर किसी देश में काम करते हैं उनसे मतभेद होंगे. उनके बारे में यह आपका मूल्यांकन है, मतभेदों को प्रकट करने का क्या यह आपका तरीका है? ऐसा लगता है कि शब्दकोश खोलकर बैठ गए और ढूंढ़-ढूंढकर शब्द निकाले गए हैं, ‘अक्षम, संवेदनहीन, गैर-जिम्मेदार.’ लेकिन ये शब्दों का खेल नहीं है. आगे कहा गया, “इस सरकार ने जनादेश के साथ धोखा किया है.” हम यहां लोगों द्वारा चुनकर आए हैं और जब तक लोग चाहेंगे हम रहेंगे, आपका मैनडेट क्या होता है? “इट इज ए गवर्नमेंट डेट हेज बेट्रेयेड द मैनडेट.” किसने आपको जज बनाया है? आप यहां तो शक्ति परीक्षण के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन जब चुनाव होंगे तो हो जाएंगे दो-दो हाथ. लेकिन यह क्या है? अरे, सभ्य तरीके से लड़िए. इस देश की मर्यादाओं का ध्यान रखिए. गाली से समस्याओं का समाधान नहीं होगा.

अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री

 

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